Thursday, 1 June 2017

जानिए क्या गौतम ही बौद्ध धर्म के संस्थापक थे ?

  एक आम धारणा यह है कि गौतम(गोतम) बुद्ध ने सर्वप्रथम बौद्ध धर्म की स्थापना की ।बुद्ध को हिंसा या शव को देख वैराग्य उत्पत्न हुआ और उसके बाद उन्होंने गृह छोड़ के जंगल में ज्ञान प्राप्त किया तथा बौद्ध धर्म की स्थापना की।

किन्तु ,यदि हम बौद्ध साहित्य जैसे की दीपवंश जो की पालि वंश - साहित्य की सर्वप्रथम रचना है ( इतिहासकारो ने इसका काल 307-247 ईसा पूर्व माना है) उसके अनुसार देखते हैं तो गौतम से पहले भी प्रत्यक्ष रूप से तीन अन्य बुद्धों का जिक्र है ।

दीपवंश के सत्रहवें परिच्छेद( महिंदस्स परिनिब्बान) में कहा गया है -
अभयं वट्ठमान ...... सासने ।(6)
से लेके
तिस्सस्स ........ दग्गमानसो ( 86)

अर्थात , चारो बुद्धों के शासन में चार पुरों( नगरों) के पृथक पृथक नाम थे
1- अभय - ककुसन्ध बौद्ध के समय लंका में प्रथम धम्मोपदेश स्थल रहा ।
2- वर्धमान- कोणागमन ( कोनागमन)बुद्ध के समय
3- विशाल- कस्सप बुद्ध के समय
4- अनुराधपुर- गौतम बुद्ध के समय

दीपवंश कहता है कि गौतम से पहले ककुसन्ध फिर कोणागमन उसके बाद कस्सप और फिर अंतिम गोतम बुद्ध हुए।

इन चारों बुद्ध अवतारों( शास्ताओं) के समय कौन कौन से राजा थे यह भी बताया गया है-
1- अभय- ककुसन्ध बुद्ध के समय यह अभय नगर का राजा था।
2- समीद्द( समृद्ध) - कोनागमन बुद्ध के समय वर्धमान नगर का राजा था।
3-जयन्त - यह कस्सप बुद्ध के समय विशाल नगर का राजा था ।
4- देवानांम्पिय तिस्स -यह गौतम बुद्ध के समय अनुराधपुर का राजा था।

चारो बुद्धों के अवशेष इस प्रकार थे -
1- ककुसन्ध बुद्ध का अवशेष था धम्मकारक
2- कोनागमन बुद्ध का अवशेष था काय-बंध( करधन)
3- कस्सप बुद्ध का अवशेष था उनकी जल शिटिका
4- गौतम बुद्ध का अवशेष था उनकी अस्थियां।

चारो बुद्धों ने अलग अलग वृक्षो के नीचे ध्यान लगाया था।

1- ककुसन्ध ने शिरीश
2-कोनागमन ने उंदुबुर
3-कस्सप ने न्यग्रोथ वृक्ष के नीचे
4- गौतम ने अस्सत्थ(पीपल) के नीचे

चारो बुद्धों के काल में विपत्तियां( उपद्रव)
1-काकुसन्थ के समय प्रज्वरक ( ज्वार महामारी)
2-कोनागमन के समय दुर्वृष्टि ( वर्धमान नगर में विवाद)
3- कस्सप बुद्ध के समय विशाल नगर में उपद्रव हुआ ।
4- गौतम के समय यक्षो का उपद्रव हुआ ।

चारों बुद्धों के प्रधान शिष्य थे -
1- ककुसन्ध का महादेव
2-कोनागमनक सुमन
3- कस्सप का महान
4 -बुद्ध का महिद्दी( महिंदर)

दीपवंश प्रथम बुद्ध ककुसन्ध के बारे में कहता है कि सर्वप्रथम उन्होंने ही लंका ( उस समय उसका नाम ताम्रपार्नि ) देखा । उस समय लंका में पुन्नकरनक नाम का ज्वार महामारी फैली थी । सिंहली जनता दुःख से तड़प रही थी तब ककुसन्ध बुद्ध अपने चालीस हजार भिक्खुओ के साथ जम्बुद्वीप से वँहा( अभयपुर) पधारे और लोगो को रोगों से मुक्ति दिलाई। राजा अभय के आग्रह पर ककुसन्ध बुद्ध ने रुचिनन्दा भिक्खुनी से शिरीष बोधिशाखा मंगाई और अभय पुर के बोधिशाखा प्रतिष्ठित की।

इतना तो ऐतिहासिक प्रमाणिक है कि गोतम बुद्ध से पहले अन्य बुद्ध हो चुके थे , अतः यह कहना की बौद्ध धर्म गोतम ने चलाया यह धारणा मिथ्या ही है ।गोतम बौद्ध धर्म के संस्थापक नहीं बल्कि शास्ता थे।

भाषा वैज्ञानी राजिन्द्र प्रसाद जी मेजर फ़ोर्ब्स के जनरल ऑफ़ एशियाटिक सोसायटी जून अंक 1836 का हवाला देके कहते हैं ककुसन्ध का काल 3101ईसा पूर्व मानते हैं और कोनागमन ( कनकमुनि) बुद्ध का 2099ईसा पूर्व


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